अंक 12 --- नवम्बर 09-फरवरी 10 ---- बुन्देलखण्ड विशेष

सम्पादकीय/बात दिल की
लोकसंस्कृति और लोकभाषा का संरक्षण अपरिहार्य

धरोहर --- ईसुरी की फागें

आलेख
बुन्देली काव्य में सामाजिक यथार्थ/डॉ0 अवधेश चंसौलिया
बुन्देलखण्ड का लोकसाहित्य/अयोध्याप्रसाद गुप्त ‘कुमुद’
बुन्देली लोक साहित्य में मामुलिया/डॉ हरीमोहन पुरवार
बुन्देली लोकगीतों में लयात्मक नाद-सौन्दर्य/डॉ0 वीणा श्रीवास्तव
बुन्देली जीवन-शैली में व्याप्त लोकविश्वास/डॉ0 उपेन्द्र तिवारी

कहानी
धिक्कारता हुआ चेहरा/युगेश शर्मा

लघुकथा
फूल और बच्चा/कुंवर प्रेमिल
पत्री ‘कुंडली’/राजीव नामदेव ‘रानालिधौरी’

काव्य-प्रसून
बुन्देली गारी/पुष्पा खरे
अपनी नौनी बुन्देली बोली/पं0 बाबूलाल द्विवेदी
कैसें सुदरे दसा गांव की/श्यामबहादुर श्रीवास्तव ‘श्याम’

गीत
चाहना हो रोशनी की/हितेश कुमार शर्मा

मुखर स्वर
विस्मयकारी हर्ष का अनुभव/डॉ0 दिनेशचन्द्र द्विवेदी
स्पंदन को आपकी देखरेख चाहिए है अभी/सुधांशु चौधरी

पुस्तक समीक्षा
संवेदनाओं का संताप/डॉ0 सुरेन्द्र नायक

युवा स्वर
मैं अकेला खड़ा रह गया/हेमंत

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