गीत -- दिनेश चन्द्र दुबे -- याद, मौन के स्वर


जुलाई-अक्टूबर 10 ---------- वर्ष-5 अंक-2
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गीत-दिनेश चन्द्र दुबे
याद


ऐसी घिरी घटा सी याद,
मन तरसा, फिर वर्षों बाद,
ऐसे लिखे गीत, यादों ने
बरसे मेघ, युगों के बाद।।

ऐसी घिरी चाँदनी मुख पर,
बरसी कविता, खुद अधरों पर,
तुमने गाया, गीत कभी था,
आया आज, अचानक लव पर,
उठी कलम लो वर्षों बाद,
ऐसी घिरी घटा सी याद।।
साज उठा लूँ, या कुछ गा लूँ,
या फिर रूठी कलम मना लूँ,
आना फिर कल मेघ अभी मैं,
अपना सूना बाग सजा लूँ,
ऐसा शीतल झोंका मन में,
फिर आया वर्षों के बाद।।

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मौन के स्वर


मौन सन्नाटों की,
आ उम्र पियें,
इन अधरों में,
आ और जियें।।

कितनी बातें हैं,
सुनें इनकी सनम,
उम्र की सारी तपिश,
आ भूलें तो हम,
बोलें हम कुछ भी नहीं
इनकी सुनें।।
कितने तड़पे हैं,
अंधेरे में हम तुम,
साँस चलती थी,
मगर, हैरत में थे हम,
कान से कान लगा,
मौन सुनें।।
कितने कातिल थे,
अंधेरे अब तक,
कौन करता फिर सबर,
बोलो कब तक,
मौन भाषा का तेरी,
अर्थ गुनें।।

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68, विनय नगर 1,
ग्वालियर (म0प्र0) पिन-474012

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