कविता -- कवि चमन ठाकुर -- प्रेम गीत


जुलाई-अक्टूबर 10 ---------- वर्ष-5 अंक-2
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कविता-कवि चमन ठाकुर
प्रेम गीत


आओ सब मिलकर
एक प्रेम गीत गाएँ
फूलों के इस अनुपम चमन में
तन-मन महकाएँ
शील सदाचार संस्कार से
अहं गलितकर आत्मजोत जगाएँ
तोड़ डालें बन्धनकारा
विराट में समा जाएँ
आओ सब मिलकर
एक प्रेम गीत गाएँ।।

आओ सब मिलकर
एक प्रेम गीत गाएँ
फूलों के इस अनुपम चमन में
एक गुल नया खिलाएँ
हिन्दु-मुस्लिम, सिख-ईसाई
धर्म भेद मिटाएँ
एक जोत से सब जग उपजा
एक परम् सत्य अपनाएँ
काम क्रोध से दूर रहें
सागर सम हो जाएँ
आओ सब मिलकर
एक प्रेम गीत गाएँ।।

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शेहूबाग, पत्रालय पराड़ा
नाहन -सिरमौर, (हि0प्र0) 173001

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