हाइकु


हाइकु / जुलाई-अक्टूबर 08
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कुन्दन पाटिल



1- प्रेम का वास
सुख, शान्ति, समृद्धि
वही विराजी।

2- प्यार का होना
दिनचर्या बदला
संभाविक है।

3- रोशनी करें
अंधियारा भगाएँ
दीप जलाएँ।

4- भाग्य संवारें
सफलता को छुएँ
मेहनत से।

5- मिटाना होगा
बैर, विद्वेष हमें
प्रेम बढ़ेगा।

6- जीवन भर
मैं-मैं करता रहा
हाथ है खाली।

7- कुर्सी के लिए
अभिनय करता
आज का नेता।

8- मैं और मेरा
दायरा जीवन का
सिमट गया।

9- सुख-दुःख में
शामिल होना, कर्म
सम्मान यहीं।
10- शरीर यह
अमानत आत्मा की
क्यों इतराते?

11- कैसी दुश्मनी
मजाक जो उड़ाते
सच्चे प्रेम का।

12- भूकम्प त्रास्दी
सेवा समर्पण का
समय सही।

13- प्रेम सत्य है
सत्य ही अमर है
यही ज्ञान है।

14- रक्षा राष्ट्र की
करना हमें कर्म
निभाना धर्म।


129, नयापुरा,
मराठा समाज,
देवास (म0प्र0) 455001

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